Autism

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Autism:

बच्चे... कितने प्यारे होते हैं, बच्चों से परिवार में एक अलग सा खुशनुमा माहौल बना रहता है, बच्चों की किलकारियों से,बदमाशियों से हर घर गुलजार होता है, लेकिन यही किलकारियां, बदमाशियां, अगर घर में हो ही न तो,कैसा लगेगा ?

छोटे बच्चे जब जन्म लेते है तब,उसके बाद से ही वह,सिखना और बढ़ना शुरू करदेते हैं, कुछ समय बाद जब धीरे धीरे बच्चे बडे़ होते हैं तो अपने आस पास के लोगों को देखकर हंसते हैं, मुस्कुराते हैं, लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जो हंसाने पर ,आवाज देने पर भी किसी प्रकार की कोइ प्रतिक्रिया नहीं देते, ऐसे बच्चे आटिज्म से पीड़ित होते हैं ,तो चलिए जानते हैं कि आटिज्म क्या है...

आटिज्म एक मानसिक बिमारी  है..जो छोटे बच्चों में पायी जाती है, इस बिमारी की संम्भावना एक साल से तीन साल के बच्चों में सबसे अधिक होती है ,आटिज्म से पीड़ित बच्चा बहुत शांत होता है, वह किसी भी प्रकार  की चीजों से में रूचि नहीं लेता, बहुत कम बोलता है ,या फिर बोलता ही नही ,आटिज्म से पीड़ित बच्चे अपनी मनोभावों को व्यक्त नहीं कर पाते,किसी भी प्रकार के खेल में रूचि नहीं लेते ,मगर किसी एक खिलौने से बहुत लगाव रखते हैं।

आटिज्म के कारण- 

 डाक्टरों का कहना है कि आटिज्म की बिमारी बच्चों में इसलिए होती हैं कि,  माताएं गर्भावस्था में पौष्टिक भोजन नहीं लेती,बहुत ज्यादा चिंतन करती हैं या तनाव लेती हैं,जिस वजह से बच्चों में सेन्ट्रलनर्वस सिस्टम को नुकसान पहुचता है जो बाद मे आटिज्म का कारण बनता है। आटिज्म बच्चों की पहचान-

आटिस्टिक बच्चे और बच्चों की तुलना में बेहद शांत और सुस्त होते हैं,जैसे यदि कोई बच्चा हंस रहा है, खेल रहा है,बच्चों के साथ घुलमिल रहा है तो,वहीं आटिस्टिक बच्चे इसके विपरीत शांत बैठे रहेंगे ।

लोंगो से सही तरीक़े से मिलते नहीं  ,बहुत संकोची होते हैं।

किसी भी प्रकार के खेल में रूचि नहीं रखते ..।

किसी खास खिलोने से बहुत लगाव रखते हैं।

आटिस्टिक बच्चे बोलते कम है मगर इनकी सुनने की झमता और बच्चों से अलग होती है।

इलाज- 

  • डाक्टरों का कहना है कि प्यार ही आटिस्टिक बच्चों का इलाज है।ऐसे बच्चों को प्यार चाहिए होता हैं जिससे कि वह आपसे लगाव रखते हैं और आपकी बाते सुनते हैं ,इन बच्चों को अगर प्यार से सिखाया जाये तो अपना काम करना थोड़ा बहुत सीख लेते हैं.।
  • ऐसे बच्चों को खेल के माध्यम से  चीजे सिखानी चाहिए, लोगो के बीच में रखना चाहिए ताकि वह आपस में घुले -मिले ,इसके अलावा मनोवैज्ञानिक चिकित्सक के पास समय -समय ले टर जाना चाहिए जिससे कि यह पता चले कि बच्चा कितना सीख रहा है। 
  • प्रति वर्ष आटिस्टिक बच्चों के लिए 2 अप्रैल को वर्ड आटिस्टिक डे मनाया जाता है" ताकि हम इन बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ ला सके।           
  • #Mums life

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Jyotsna pandey | 3 Posts



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