आइये इस स्वतंत्रता दिवस नव भारत का निर्माण करें।

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आइये इस स्वतंत्रता दिवस नव भारत का निर्माण करें।

आइये इस स्वतंत्रता दिवस नव भारत का निर्माण करें।:

 
15 अगस्त अर्थात स्वतंत्रता दिवस उन महान स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता है जिन्होंने इस देश को स्वतंत्र कराने में अपनी जान तक न्योछावर कर दी। इस दिन को देश भर में उल्लास के साथ मनाया जाता है। सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, कॉलोनियों में झंडा फहराया जाता है। मिठाई बाँटी जाती है, राष्ट्रगीत गाया जाता है और आजादी के लिए लड़ने वालों और बलिदान देने वालों को याद किया जाता है। पर क्या वाकई हम आज आजाद हैं? अंग्रेजों की गुलामी से तो आजादी मिल गई पर आज भी देश कई सामाजिक बुराइयों का गुलाम है। 

आज भी हमारे देश में लोगों को अपने विचार व्यक्त करने, अपनी बात रखने की स्वतंत्रता नही। शिक्षा का अधिकार आज भी हर बच्चे को प्राप्त नहीं हुआ,  नौकरियां भी सिफारिशों पर दी जाती हैं। भारत जैसे  आत्मनिर्भर देश में सभी लोगों को शिक्षा व काम के समान अवसर और सम्मान पूर्वक जीवन प्रदान करने की दिशा में बहुत प्रयास करने हैं। 

घर में बुजुर्गों का सम्मान नहीं किया जाता, उन्हें घर से निकाल दिया जाता है और वृद्धाश्रमों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। कैसी मानसिकता है हमारी? हमारे विचारों में आजादी नहीं है,  हमारी सोच इतनी संकीर्ण है, फिर हम कैसे कह सकते हैं कि हम आजाद हैं? 

आज भी हमारे देश में महिलाएं रात को बाहर निकलने में सुरक्षित नहीं है। घर और बाहर उन्हें अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता नहीं है।  वह अपनी मर्जी से नौकरी नहीं कर सकती, कपड़े नहीं पहन सकतीं। शिक्षा का अधिकार लड़कियों को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं। फिर हम कैसे कह सकते हैं कि हमारा देश आज़ाद है। 

आए दिन हम अखबारों में महिलाओं और बच्चों के साथ यौन शोषण व रेप जैसी खबरों को पढ़ते हैं। देश के किसी भी कोने में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग सुरक्षित नहीं हैं। देश के लोगों की मानसिकता ही ऐसी हो गई है। भाई भाई को मारता है। लोगों के दिलों में एक दूसरे के प्रति दया,  प्रेम और सद्भावना ही नहीं रही। लोग, हिंसक दुर्घटनायें होने पर मूक दर्शक बन कर रह जाते हैं। कैसे कहें कि हमारा देश आज़ाद है? 

आज भी स्वतंत्रता दिवस कुछ लोगों के लिए सिर्फ छुट्टी है। आज की युवा पीढ़ी आधुनिकता की चकाचौंध में इतनी खो गई है कि उन्हें देश, देश भक्ति से कोई लेना देना नहीं।
स्वतंत्रता दिवस के नाम पर शॉपिंग मॉल में घूम लिया जाता है या किसी अच्छे होटल में खाना खा लिया जाता है। अगले दिन सड़कों पर बिखरे तिरंगों को कूढ़े में फैंक दिया जाता है। बस यही उनके लिए स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी है। 
आज बहुत जरूरी है कि बच्चों में शुरू से ही अच्छे संस्कार और देशभक्ति के गुण भरे जाएं। बच्चे घर में माता-पिता से ही सीखते हैं,  इसलिए माता-पिता की जिम्मेदारी है कि अपने बच्चों को सही और गलत में भेद सिखाएं। बेटे और बेटियों में कोई भेद ना रखें। बेटों को अपनी बहनों, माँ, पत्नी, व हर महिला का आदर करना सिखायें और छोटों से प्रेम करना सिखायें।  

जब इस देश में हर महिला को अपने विचार प्रकट करने की स्वतंत्रता होगी, बड़े बुजुर्गों का सम्मान होगा, बेटा बेटी में भेद नहीं होगा, छुआछूत और दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों का अंत होगा और लोगों की मानसिकता बदलेगी तभी सही अर्थों में हम अपने देश को आजाद और आत्मनिर्भर कह सकते हैं। हमें अपने विचारों में स्वतंत्रता लानी होगी।

आइए हम सब इस स्वतंत्रता दिवस पर प्रण करें कि जिन कुरीतियों ने भारत देश को जकड़ा हुआ है उन्हें मिटा दें, खत्म कर दें और एक नये भारत का निर्माण करें।

धन्यवाद।

#independence day

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Amarjeet Sonia Madaan | 16 Posts



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